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विदेशी कॉल्स को लोकल में बदलता था ये गिरोह, आतंकी इसी से करते थे हैकिंग

रायपुर.छत्तीसगढ़ के एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड (एटीएस) और रायपुर क्राइम ब्रांच ने दिल्ली, मुंबई और पुणे में छापे मारकर विदेशी कॉल्स को लोकल में बदलकर देश को 30 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने वाले एक शातिर गैंग का भंडाफोड़ किया है। गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया। इनसे ऐसी पोर्टेबल फोन एक्सचेंज मशीन जब्त की गई है, जो विदेशी कॉल्स को लोकल में बदल देती है।
विदेश में बैठकर ठग इन्हीं मशीनों का इस्तेमाल करके यहां ठगी कर रहे हैं। रिपोर्ट होने पर देशभर की पुलिस को लोकल नंबर मिलते हैं, इसलिए पुलिस अपराधियों तक नहीं पहुंच पाती। गिरोह से पूछताछ में यह खुलासा भी हुआ है कि इस जालसाजी में चीन के गिरोह मदद कर रहे हैं। पकड़ी गई मशीन और साफ्टवेयर भी चीन से कूरियर से मंगवाया गया था। जांच में पता चला कि इस मशीन का इस्तेमाल आईएसआई तथा कुछ आतंकी संगठन भी धमकी वगैरह के लिए कर रहे हैं।
रायपुर कंट्रोल रूम में इस मामले का खुलासा आईजी प्रदीप गुप्ता और एसपी अकबर राम कोर्राम ने किया। अफसरों ने यह मशीन भी मीडिया के सामने रखी और आरोपियों को भी लाया गया। उन्होंने बताया कि गिरोह को पकड़ने का ऑपरेशन डेढ़ महीने चला। इस दौरान दिल्ली और मुंबई के अलावा देश के कई और शहरों में छापे मारे गए। तब जाकर गिरोह पकड़ा गया। इनसे 10 सिम बॉक्स मशीनें जब्त की गई हैं। ये सिम बाक्स छोटे टेलीफोन एक्सचेंज की तरह हैं। इनमें 32 सिम लगाकर इंटरनेशनल कॉल को लोकल में बदला जा रहा था। इसके अलावा सिम बैंक, लैपटॉप, नेटवर्क बुस्टर, डेटा कार्ड और राउटर मिला है। पूरा सामान चीन निर्मित है और जालसाजों ने वहीं के गिरोहों की मदद से मंगवाया था। पुलिस ने सभी अरोपियों को 2 दिन की रिमांड पर लिया है।
दो महीने पहले रायपुर में आए एक कॉल से फूटा रैकेट
मोवा के एक कारोबारी को करीब दो महीने पहले आया। कॉल करने वाले ने कहा उनकी 25 लाख की लॉटरी लगी है। कारोबारी समझ गए कि यह किसी ठग का फोन है। उन्होंने पुलिस में शिकायत की। पुलिस से यह केस एटीएस के पास पहुंच गया। अाला अफसरों के निर्देश पर एक्सपर्ट के माध्यम से जांच करवायी गई। इस दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। उसके बाद क्राइम ब्रांच और थाने के अफसरों की चार टीम बनाई गई। उसके बाद दिल्ली-मुंबई से लेकर चीन तक फैले रैकेट का खुलासा हुआ।
दो साल में देश को 30 करोड़ का घाटा
दरअसल देश को विदेशी कॉल्स से चार्ज के तौर पर इंटरनेशनल करेंसी मिलती है। इन मशीनों के जरिये ऐसे कॉल्स लोकल में ही बदले जा रहे थे, इसलिए यह चार्ज नहीं मिल रहा था। पुलिस अफसरों का अनुमान है कि इनके जरिये जालसाजों ने दो साल में देश को मिलने वाली 30 करोड़ रुपए मूल्य की विदेशी करेंसी का नुकसान पहुंचाया है।

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