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शरद पूर्णिमा आज, बरसेगा अमृत, खुले आसमान के नीचे रखे जाएंगे खीर

शहर में शरद पूर्णिमा विधि विधान से मनाया जाएगा। गुरुवार को देवी लक्ष्मी, कुबेर और चंद्र देव की पूजा होगी। खीर का भोग लगाया जाता है। हिन्दू धर्म के मान्यता है कि इस दिन अश्वनी मास शरद पूर्णिमा को अमृत की वर्षा होती है। जिसे श्रद्धालुओं द्वारा खीर बनाकर छत में रखी जाएगी।

गुरुवार की रात शरद पूर्णिमा को अमृत बरसेगा। हिन्दू धर्म की मान्यता अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन चांदनी रात में चन्द्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी और रस पूर्णिमा भी कहते हैं। हिन्दू पंचाग के आधार पर अश्वनी मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा मनाते हैं।

शरद पूर्णिमा का चांद सोलह कलाओं से संग्रह होकर अपनी कलाओं से अमृत की वर्षा करते हैं। खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखने से जो चंद्रमा की किरणे खीर पर पड़ती है। वह गुणकारी तथा रोगों को दूर करती है। यह खीर अमृत के सामान होती है। पूरे साल में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है।

शरद पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी, कुबेर और चंद्र देव की विधि विधान से पूजा किया जाता है। जिसमें खीर का भोग लगाकर खुले आसमान के नीचे रखा जाता है। पूर्णिमा के दूसरे दिन सुबह स्नान के बाद विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद अमृत रूपी खीर को भोग ग्रहण किया जाता है। इसके साथ ही पंडित एवं कन्याओं को भोग वितरण किया जाता है।

शरद पूर्णिमा की विधि – हिन्दू धर्म मान्यता अनुसार देवी लक्ष्मी, कुबेर और चंद्र देव की पूजा की जाएगी। विशेष पूजा में खीर को भोग लगाकर चंद्रमा की चांदनी में रखी जाएगी। इसे सुबह स्नान के बाद पूजा कर अमृत रूपी खीर का ग्रहण किया जाएगा। शरद पूर्णिमा को लेकर मंदिरों में विशेष तैयारी की गई है। इस अवसर पर पूजा-अर्चना के बाद भोग-भण्डारे का आयोजन किया जाएगा। मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने रहेगी।

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