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आखिर सांसद एवं विधायकों से क्यों नाराज है बिजारी घरघोड़ा के ग्रामीण..?

*🎴आखिर क्यों बरौद कोलमाइन्स के खिलाफ चक्का जाम एवँ आर्थिक नाकेबन्दी की दे रहे चेतावनी..?*

*🚦रायगढ़* यूं तो सरकारें बेरोजगारों को रोजगार देने का खूब दावा करती है बेरोजगारों के लिए केंद्र एवँ राज्य सरकारों के द्वारा अनेको योजनाएं भी संचालित करने का दावा किया जाता है लेकिन जब खुद की जमीन कोयला खदान के लिए अधिग्रहण करने के 4 वर्षों बाद भी जब भुविस्थापितों को नौकरी न मिले तो मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रुख अपनाना पड़ता है ऐसा ही आंदोलन इनदिनों ग्घरघोड़ा तहसील के बिजारी खुली खदान में चल रहा है जहाँ नौकरी की मांग को लेकर पिछले 64 दिनों से प्रभावित ग्रामीण आंदोलनरत है अब तक उनकी मांगों पर कोई सुनवाई नही हो रही है मांगे पूरी नही होने पर भूविस्थापितों ने आंदोलन तेज करने एवं चक्का जाम की दी चेतवानी ,स्थानीय विधायक एवं सांसदों पर निष्क्रियता का आरोप लगाया है। अपनी जमीन एसईसीएल द्वारा ले लिए जाने के बाद नौकरी नही मिलने से खुद को ठगा महसूस कर रहे है।

*🎴सन 2015-16 में ली गई थी जमीन आजतक नही मिली नौकरी*

बिजारी गांव के लगभग 200 परिवारो की जमीन एसईसीएल द्वारा बिजारी ओपन कास्ट कोलमाइन्स के लिए भुर्जन किया गया था। तात्कालिक कलेक्टर श्रीमती शम्मी आबिदी के उपस्थिति में बड़े तामझाम के साथ उक्त कोलमाइन्स का शुभारंभ भी किया गया था किंतु आज दिनाँक तक नौकरी नही मिलने के कारण पिछले 64 दिनों से आंदोलन की राह पर है।

*🎴व्होट लेने के बाद नही आये सांसद एवं विधायक*

यूं तो मतदान के पूर्व सांसद एवं विधायक ग्रामीणों से बड़े-बड़े वादे करते हैं किंतु जैसे ही चुनाव संपन्न होता है चुनाव परिणाम के बाद उन वादों पर अमल करना तो दूर ग्रामीणों को अपनी शक्ल दिखाना भी यह सांसद या विधायक मुनासिब नहीं समझते ऐसा आरोप पिछले 65 दिनों से ओपन कास्ट कोल माइन्स में नौकरी की मांग को लेकर बैठे ग्राम बिजारी के भुविस्थापितों ने धरमजयगढ़ के विधायक लालजीत राठिया एवं सांसद विष्णु देव साय पर लगाया है उनका आरोप है कि उनके द्वारा अपनी जमीन के बदले नौकरी की मांग को लेकर दोनों जन प्रतिनिधियों को अवगत कराया है किंतु इनके द्वारा सिर्फ कोल माफियाओं को संरक्षण देने का कार्य है किया जाता है कभी भी भू अर्जन के बाद अपनी जमीन लुटा चुके आदिवासियों एवं ग्रामीणों की सुध लेने की फुर्सत इन जनप्रतिनिधियों को नहीं मिली है अबकी बार अगर यह जनप्रतिनिधि कभी वोट मांगने आएंगे तो ग्राम बिहारी की जनता इनको करारा सबक सिखाएगी उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी समस्याओं को निराकरण करने इन जनप्रतिनिधियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता तो इनके विरुद्ध भी जमकर प्रदर्शन किया जाएगा

🎴 *बिजारी के ग्रामीण करेंगे आर्थिक नाकेबंदी एवं चक्का जाम*

ओपन कोल माइन्स बिजारी के लिए अपनी जमीन देने के बाद भी लगभग 5 वर्ष गुजर जाने एवं स्थाई नौकरी के बजाय सिर्फ आश्वासन के कारण नाराज चल रहे भू विस्थापितों ने एसईसीएल एवं स्थानीय प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं एवं मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया जाता है तो उनके द्वारा बड़ोद ओपन कोल माइन्स के सामने पूरे दल बल के साथ आर्थिक नाकेबंदी करते हुए चक्का जाम भी किया जाएगा इससे होने वाले समस्त परेशानी एवं आर्थिक क्षति की जिम्मेदार एसईसीएल प्रबंधन एवं स्थानीय प्रशासन होगा ग्रामीणों ने एसईसीएल के अधिकारियों पर वादाखिलाफी एवं आपस में ग्रामीणों के बीच फूट डालकर आपसी लड़ाई मतभेद पैदा करने की बात भी कही है अब देखना यह है कि एसईसीएल प्रबंधन एवं स्थानीय प्रशासन ग्राम बिजारी के पिछले 65 दिनों से आंदोलनरत भू विस्थापितों की सुध लेता है या फिर किसी बड़े आंदोलन के लिए ग्रामीणों को मजबूर करता है यदि समय रहते निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के द्वारा ग्राम बिजारी के प्रभावितों को न्याय दिलाने कोई ठोस पहल नहीं की जाती है तो ग्राम बिहारी के ग्रामीणों द्वारा लोकसभा चुनाव में मतदान के बहिष्कार की बात भी कही है l