हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुंबई मेयर ने कंगना रनौत को कहा ‘नटी’ और दो टके के लोग

हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुंबई मेयर ने कंगना रनौत को कहा ‘नटी’ और दो टके के लोग

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नई दिल्ली: मुंबई हाइकोर्ट का फैसला कंगना रनौत के पक्ष में आने पर मुंबई मेयर किशोरी पेडनेकर भड़क गईं। उन्होंने कहा, एक नटी जो हिमाचल में रहती है, वो आके हमारी मुंबई को पीओके बोलती है। उसके बाद उसके खिलाफ शिकायत आती है। जो दो टके के लोग कोर्ट को भी राजकीय अखाड़ा बनाना चाहते हैं, वह गलत है। उन्होंने कहा, कोर्ट की तरफ से जो निर्देश दिया गया है, उसकी अवमानना नहीं करेंगे। कोर्ट के जजमेंट को स्टडी करेंगे और 354 ए के बारे में यही हाइकोर्ट ने पहले जो हमें निर्देश दिए हैं, उसे चैक करेंगे।

कंगना रनौत के दफ्तर में तोड़फोड़ के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को फटकार लगाई है। बीएमसी के नोटिस को हाईकोर्ट ने रद्द करते हुए तोड़फोड़ से हुए नुकसान का आंकलन करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि कंगना रनौत के कार्यालय में तोड़फोड़ दुर्भावना के अलावा कुछ नहीं है।

बृहन्मुंबई नगर निगम या बीएमसी ने 9 सितंबर को मुंबई के पाली हिल में कंगना रनौत के बंगले के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया था। कंगना ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ नागरिक निकाय की कार्रवाई महाराष्ट्र सरकार और सत्तारूढ़ शिवसेना के खिलाफ उनकी टिप्पणियों का परिणाम है।

कंगना ने शिवसेना का नाम लिए बिना अपनी याचिका में कहा, ‘मुंबई नागरिक निकाय भारत का सबसे अमीर नगर निगम चलाता है।’ जस्टिस एसजे कथावाला और आरआई चागला की खंडपीठ ने कहा, “एमसीजीएम (नगर निगम मुंबई महानगरपालिका) नागरिकों के अधिकारों के खिलाफ गलत आधार पर आगे बढ़ी है। यह कुछ भी नहीं है।”

अदालत ने यह भी कहा कि वह किसी भी नागरिक के खिलाफ शक्ति का उपयोग करने वाले अधिकारियों को मंजूरी नहीं देता है। हालांकि अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता (कंगना रनौत) को सरकार पर अपनी राय देने में संयम दिखाना चाहिए। मुंबई नागरिक निकाय ने दावा किया है कि रानौत ने बंगले में अवैध निर्माण किया है।

बीएमसी ने पाली हिल बंगले में 14 “उल्लंघनों” को सूचीबद्ध किया, जिसमें रसोई घर के लिए चिह्नित जगह पर शौचालय और शौचालय की जगह पर कार्यालय बनाया गया था। कंगना रानौत ने नगरपालिका से 2 करोड़ के मुआवजे की मांग की, जिसे उन्होंने “अवैध” विध्वंस कहा था।

अदालत ने कहा कि वह ऐसे वैलुअर को नियुक्त कर रही है जो याचिका को सुनेगा और नागरिक निकाय के विध्वंस के नुकसान का आंकलन करेगा। इसके बाद मार्च 2021 तक मुआवजे के लिए उचित आदेश दिए जाएंगे।

उच्च न्यायालय ने 9 सितंबर को कंगना के लिए एक बड़ी जीत के बाद विध्वंस को रोक दिया था। अदालत ने कहा, “जब वह राज्य से बाहर थी तो उसे 24 घंटे के भीतर जवाब देने के लिए निर्देश दिया गया। लिखित अनुरोध के बावजूद उसे कोई समय नहीं दिया गया था।”

मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार के साथ सुशांत सिंह राजपूत की जांच की आलोचना के कारण कंगना रनौत इस साल विवादों के घेरे में रही हैं।

फिल्म थलाइवी की शूटिंग से कंगना ने ट्वीट कर हाइकोर्ट के फैसले पर कहा, यह लोकतंत्र की विजय है। उन लोगों ने जिन्होंने मेरा मजाक उड़ाया और कहा कि यह अवैध निर्माण है, नहीं ये अवैध नहीं था। उन लोगों का शुक्रिया जो मेरे साथ खड़े रहे।